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बीजेपी के ‘नेता इन वेटिंग’ बने साबिर अली

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नई दिल्ली। साबिर अली को बीजेपी में शामिल करने को लेकर पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी और वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र की नाराजगी को संघ का साथ क्या मिला बीजेपी में साबिर की सदस्यता खतरे में पड़ गई।

अभी साबिर अली को बीजेपी में शामिल हुए 24 घंटे भी नहीं हुए थे कि उनका पार्टी के अंदर से तीखा विरोध शुरू हो गया।


साबिर ने लिखी चिट्ठी
जाहिर है साबिर अली के लिए ये ‘सिर मुंडाते ही ओले पड़े’ जैसी स्थिति थी। बीजेपी ज्वाइन करते ही उन्हें इस कदर विरोध का सामना करना पड़ा कि सियासी पैंतरा चलते हुए उन्हें अपनी सदस्यता स्थगित करने के लिए चिट्ठी लिखनी पड़ी। साबिर ने मीडिया के सामने आकर बताया कि उन्होंने बीजेपी के बिहार प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान को चिट्ठी लिखी है और कहा है कि वो उनकी सदस्यता को स्थगित कर दें। 

‘आरोप साबित हुआ तो लूंगा सन्यास’
साबिर ने चिट्ठी में लिखा है कि पार्टी उनके ऊपर भटकल से रिश्तों के आरोप की जांच करा ले। उन्होंने दावा किया कि अगर उन पर लगे आरोप साबित होते हैं तो वो राजनीति से ही सन्यास ले लेंगे।

नकवी बड़े भाई- साबिर
नकवी की नाराज़गी पर साबिर ने हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि वो मुख्तार अब्बास नकवी के साथ राज्यसभा में काम कर चुके हैं। और विपक्षी पार्टी में होने के बाद भी नकवी कभी इस तरह से पेश नहीं आए जिस तरह से वो अभी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। साबिर ने कहा कि नकवी उनके बड़े भाई की तरह हैं और वो उन्हें भी पत्र लिखकर उनकी नाराज़गी दूर करने की कोशिश करेंगे।

बीजेपी में साबिर पर संग्राम :


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