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कुमार विश्वास के पिता ने कहा- राहुल को हराना मुश्किल, बेहद ज़िद्दी और लापरवाह है कुमार

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कुमार विश्वास के पिता ने कहा- राहुल को हराना मुश्किल, बेहद ज़िद्दी और लापरवाह है कुमार - Image 1
कुमार विश्वास के पिता ने कहा- राहुल को हराना मुश्किल, बेहद ज़िद्दी और लापरवाह है कुमार - Image 1
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने भले ही औपचारिक तौर पर कुमार विश्वास को अभी तक अमेठी लोकसभा प्रत्याशी घोषित न किया हो लेकिन उनकी उम्मीदवारी लगभग तय मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में मुकाबला इस बार दिलचस्प होने वाला है। कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है’ कविता से युवाओं के बीच पहचान बनाने वाले कुमार विश्वास वहां ‘आप’ की लहर पर सवार कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ सकते हैं। 
लेकिन, विश्वास के पिता चंद्रपाल शर्मा को यह बिल्कुल भरोसा नहीं है कि उनका बेटा कुमार विश्वास लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को शिकस्त दे सकता है। चंद्रपाल के अनुसार यदि कुमार विश्वास अमेठी में राहुल गांधी को हरा देता है, तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेठी में कुमार विश्वास की जीत लगभग नामुमकिन है। कुमार के पिता ने आगे कहा कि “विश्वास जिद्दी, लापरवाह और स्वाभिमानी है।” 
कुमार के पिता का कहना है कि वह हमेशा घर वालों के फैसलों और पसंद को नकारता रहा है। चंद्रपाल शर्मा के मुताबिक उन्होंने कुमार विश्वास को सलाह दी थी कि वह दिल्ली में ही किसी सीट से चुनाव लड़ें। लेकिन कुमार विश्वास ने कहा कि वह चुनाव लड़ेंगे तो केवल अमेठी से। कुमार विश्वास के पिता चंद्रपाल शर्मा का कहना है कि उनका बेटा स्कूल के दिनों में मेधावी छात्र था। परिवार कुमार को इंजिनियरिंग पढ़ाना चाहते था लेकिन उन्होंने हिंदी को अध्ययन के लिए चुना और हापुड़ कॉलेज में हिन्दी से मास्टर डिग्री में शीर्ष स्थान हासिल किया। 
कुमार साहिबाबाद (गाजियाबाद) के लाला लाजपत राय कॉलेज में हिन्दी पढ़ाते थे। यहां के अध्यापकों का कहना है कवि से नेता बने कुमार विश्वास पब्लिक लाइफ में तो जमकर नैतिकता और सिद्धांत की बात करते हैं, लेकिन कॉलेज में शायद ही कोई क्लास लेते थे। कॉलेज के प्रिंसिपल एस. डी. कौशिक ने कहा कि सरकारी सेवा में रहते हुए आप कमाई का दूसरा धंधा नहीं कर सकते। लेकिन, कुमार बिना क्लास लिए सैलरी हर महीने लेते थे। इसके साथ ही वह मंचीय कविता के जरिए भी कमाई करते थे। उन्होंने पूछा कि क्या यह अनैतिक और सिद्धांत के खिलाफ नहीं है?
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