विधानसभा में ‘आप’ विधायकों की लगेगी क्लास

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विधानसभा में ‘आप’ विधायकों की लगेगी क्लास

नई दिल्ली। दिल्ली के नए-नए विधायकों के कारण कार्यवाही में कोई परेशानी न हो, इसलिए इनके प्रशिक्षण का इंतज़ाम किया गया है और विधायक 

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नई दिल्ली। दिल्ली के नए-नए विधायकों के कारण कार्यवाही में कोई परेशानी न हो, इसलिए इनके प्रशिक्षण का इंतज़ाम किया गया है और विधायक चुपचाप बैठने की बजाय सक्रिय भागीदारी निभा सकें। कार्यवाही के दौरान वे अध्यक्ष से बातचीत, सदन में उठने-बैठने और आने-जाने के तौर-तरीके की जानकारी लेंगे। दिल्ली विधानसभा 30-31 जनवरी को चार-चार घंटे के विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने जा रही है।
विधायकों को प्रशिक्षण देने के लिए लोकसभा कार्यवाही से जुड़े एक्सपर्ट शामिल किए गए हैं। लोकसभा अध्यक्ष के सलाहकार वीके शर्मा और लोकसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा समेत कुछ अन्य विशेषज्ञ अधिकारी दिल्ली के विधायको को गुर सिखाएंगे। यह पहला मौका है, जब अधिकारियों से विधायकों को प्रशिक्षण दिलाने की तैयारी विधानसभा ने की है। पांचवीं विधानसभा के विधायक अनुभव के मामले में काफी पिछड़े हुए हैं।

आम आदमी पार्टी के 28 विधायक समेत कुल 48 विधायक पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं। विधानसभा में पहुंचे नए विधायकों को सदन की कार्यवाही से जुड़ी एबीसीडी की जानकारी नहीं है। कांग्रेस के सभी विधायकों कार्यवाही में हिस्सा लेने का अनुभव है, जबकि भाजपा के जो विधायक पहली बार भी चुनकर आए हैं, उन्हें पार्टी स्तर पर वरिष्ठ विधायकों ने सिखाया-पढ़ाया है। फिर भी कई पहलुओं की जानकारी नहीं है। नई ‌विधानसभा में छह विधायक ऐसे हैं जो पांचवीं बार जीते हैं, पांच विधायक चौथी बार, चार विधायक तीसरी और सात दूसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं।
इन्हें प्रभावशाली बनने के तरीके सीखने हैं तो आप विधायकों की सक्रियता बढ़ाने के लिए वाकपटुता और भाषण शैली में उसे उठाने का तरीका भी सीखना है। विधानसभा के पहले सत्र में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मंत्री मनीष सिसोदिया को छोड़ दें तो आम आदमी पार्टी का कोई विधायक सदन में अपनी बात नहीं रख सका था। विधानसभा का पहला सत्र बेशक सवाल-जवाब से जुड़ा नहीं था, लेकिन आगामी सत्रों में विपक्ष की तरफ से उठाए गए सवालों के जवाब भी मंत्रियों को देने होंगे।


संपूरक प्रश्नों के तीर भी झेलने होंगे तो शून्य काल, प्रश्नकाल, कार्यवाही में विधायकों के शिष्टाचार, चर्चा के दौरान चुपचाप बैठने की बजाय सक्रिय भागीदारी, प्रभावशाली विधायक बनने के गुण, सवाल उठाने के तरीके और दिल्ली के प्रशासनिक और राजनीति सेटअप, विधानसभा की समितियां और प्रस्ताव चर्चा में शामिल होने के तरीके की जानकारी दी जाएगी। देखना दिलचस्प होगा कि ये कदम नए विधायकों के लिए कितना कारगर साबित होगा और क्या ये पुराने विधायकों से कुछ अलग सिख पाएंगे।’
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