SC के फैसले से निराशा
नई दिल्ली। यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने समलैंगिकता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असंतोष जाहिर किया है। सोनिया ने कहा कि उन्हें सुप्रीमकोर्ट के फैसले से निराशा हाथ लगी है। सोनिया के मुताबिक देश में हर शख्स को उसके मौलिक अधिकार मिलने चाहिए। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ मंत्री पी चिदंबरम ने भी
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| सोनिया गाँधी: यूपीए चेयरपर्सन |
फैसले पर निराशा जताई और कहा कि इस पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जानी चाहिए। चिदंबरम ने कहा कि सुप्रीमकोर्ट की 5 सदस्यीय बेंच इस पर कोई फैसला दे।
सरकार पर सवाल
भले ही समलैंगिकता को समर्थन करने वाली संस्था नास फाउंडेशन ने सोनिया और चिदंबरम के इस बयान पर खुशी जताई है लेकिन हिंदू महासभा ने सोनिया गांधी के इस बयान का विरोध किया है। महासभा की ओर से कहा गया है कि सोनिया को सवा अरब लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करने का हक नहीं है। उधर हिंदू महासभा ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों सरकार संसद में इस मामले पर बहस नहीं कराती। महासभा ने दावा किया कि संसद में बहस हो तो सरकार की पोल खुल जाएगी। गौरतलब है कि सुप्रीमकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सरकार चाहे तो धारा 377 को खत्म करने या उसमें बदलाव के लिए कदम उठा सकती है।






