लखनऊ । 19 दिनों से दिल्ली के बार्डर पर डटे देशभर के किसानों के समर्थन में लखनऊ में भी कई किसान संगठनों ने पैदल मार्च निकलकर धरना प्रदर्शन किया और जिला
लखनऊ । 19 दिनों से दिल्ली के बार्डर पर डटे देशभर के किसानों के समर्थन में लखनऊ में भी कई किसान संगठनों ने पैदल मार्च निकलकर धरना प्रदर्शन किया और जिला मुख्यालय घेरने के लिए कूच किया। कृषि कानून को वापस लेने की मांग को लेकर किसानों का 19वें दिन भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहा।
- नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का मार्च
- जिला मुख्यालय घेरने से किसानों को रोका गया
- पुलिस ने छठामील चौराहे पर किसानों को रोका
- राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मल शुक्ला ने पुलिस को सौंपा ज्ञापन
लखनऊ के बक्शी का तालाब के छठामील पर नव भारतीय किसान संगठन के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने जिला मुख्यालय घेरने के लिए कूच किया तो पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर किसानों को छठामील चौराहे पर ही रोक दिया और किसानों को जिलाधिकारी कार्यालय जाने नहीं दिया।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मल शुक्ला और सैकड़ों किसानों को पुलिस के अधिकारियों ने समझा-बुझाकर शांत कराया और ज्ञापन लेकर उनको वहां से वापस लौटा दिया। इस बारे में निर्मल शुक्ला से बात की तो उन्होंने बताया कि नए तीनों कृषि बिल को सरकार वापस ले, जब तक ऐसा नहीं होगा तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
वहीं नव भारतीय किसान संगठन के महासचिव सुखराम रावत कहते हैं कि सरकार किसानों के खिलाफ निर्दयता कर रही है। किसानों की बात सरकार नहीं सुन रही है। सरकार ऐसे संगठनों के संपर्क में आ गई है जो किसानों की बात मानने नहीं दे रही है। रावत का कहना है कि किसान दो चार दिन सरकार का रुख और देख ले और दिल्ली से वापस आ जाए, हम सब संगठन मिलकर जमाखोरों और पूंजीपतियों के लिए अनाज ही नहीं पैदा करेंगे।
गौरतलब है कि सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई रास्ता नहीं निकल पाया है, नए कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में किसानों का गुस्सा सरकार के खिलाफ बढ़ता जा रहा है। वहीं किसानों का मानना है कि केंद्र और प्रदेश की बीजेपी सरकार लोकतंत्र में किसानों की आवाज और आंदोलन को दबा रही है।
लखनऊ से मनीष सिंह की रिपोर्ट



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