LUCKNOW । बीकेटी के खेसरावां गांव में सरकार के दावों की खुली पोल, सरकारी ट्यूबवेल नहीं होने से किसान परेशान

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LUCKNOW । बीकेटी के खेसरावां गांव में सरकार के दावों की खुली पोल, सरकारी ट्यूबवेल नहीं होने से किसान परेशान

लखनऊ । बीजेपी सरकार के किसानों की आय दोगुनी करने का दावा लखनऊ के बक्शी का तालाब में ही खोखला साबित हो रहा है, जहां सरकार बार-बार किसानों की आय दोगुन

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Farmers upset due to not having a government tubewell
लखनऊ । बीजेपी सरकार के किसानों की आय दोगुनी करने का दावा लखनऊ के बक्शी का तालाब में ही खोखला साबित हो रहा है, जहां सरकार बार-बार किसानों की आय दोगुनी करने का राग अलापती है, वहीं बीकेटी के खेसरावां गांव के किसानों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खेसरावां गांव के किसानों के जीवन में कोई बदलाव नहीं देखने को नहीं मिल रहा है, वो जिस जद्दोजहद के साथ पहले जीवन यापन कर रहे थे वैसे आज भी कर रहे हैं, सरकार के सारे वादे खेसरावां गांव में सिर्फ खोखले ही लगते हैं। 
Farmers upset due to not having a government tubewell
  • गेंहू की खेती के लिए सिंचाई को किसान परेशान 
  • सरकारी ट्यूबवेल नहीं होने से सिंचाई के लिए परेशानी 
  • सालों से सरकारी ट्यूबवेल की लगा रहे गुहार 
  • कई बार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं 
आज तक खेसरावां गांव में सरकारी ट्यूबवेल का निर्माण नहीं कराया गया जिससे सैकड़ों किसानों को प्राइवेट लोगों से प्रति घंटा किराए पर खेतों में सिंचाई के लिए पानी लगाना पड़ता है, जैसे-तैसे फसल पैदा होती है तो उनको प्राइवेट लोगों को ही बेचना पड़ता है क्योंकि किसानों के मुताबिक उनकी फसलों को क्रय केंद्र पर खरीदा नहीं जाता है और बार-बार चक्कर लगाने से बचने के लिए किसान प्राइवेट लोगों को फसलों को बेचते हैं, जिसके कारण उनको उचित दाम भी नहीं मिल पाता है। क्रय क्रेंदों में अफसरों की कारगुजारी के किस्से जगजाहिर हैं पर बीजेपी सरकार भी इस सिस्टम को दुरूस्त करने में नाकाफी ही साबित हो रही है, छोटे किसानों की आय कितनी दोगुनी हुई है वो जमीन पर आकर देख सकते हैं। 
खेसरावां के किसान पवन कुमार ने बताया कि सिंचाई के लिए बहुत परेशानी होती है, एक सरकारी ट्यूबवेल पास हुआ भी था तो उसको भी तत्कालीन प्रधान ने कैंसिल करा दिया था, 250 रुपए प्रति घंटे के हिसाब से प्राइवेट ट्यूबवेल वाले से सिंचाई के लिए पानी लेना पड़ता है। नहर के पानी के भरोसे सिंचाई नहीं हो पाती अब नहर में पानी आया है जब सिंचाई के लिए पानी खेतों में लगा चुके हैं और यहां पर नहर का पानी पहुंचता भी नहीं है। कई बार शिकायते के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। 
Farmers upset due to not having a government tubewell
गांव के नौजवान किसान राजकुमार ने बताया कि खेती-किसानी करने के लिए बहुत परेशानी है, यहां पर सिंचाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, सरकारी ट्यूबवेल के लिए प्रधान और ब्लाक पर कई बार गुहार लगाई पर कोई सुनवाई नहीं हुई। नहर में समय पर पानी आता ही नहीं जब आता है तब तक सिंचाई हो चुकी होती है, प्राइवेट नलकूप से प्रति घंटे के हिसाब से पानी खरीदना पड़ता है। क्रय केंद्र में बार-बार दौड़ते है जिसके कारण प्राइवेट लोगों को ही फसल बेचने पर मजबूर होना पड़ता है क्योंकि पैसा नहीं होगा तो दूसरी फसल कब बोएंगे। राज कुमार आगे कहते हैं कि सरकार कम से कम एक सरकारी ट्यूबवेल ही बना दे जिससे वक्त पर सिंचाई कर सकें। 
गौरतलब है कि बीकेटी के खेसरावां गांव में खेती-किसानी करने के लिए मुसीबतों का अम्बार है, सरकार जहां बड़े-बड़े दावे करती है वहीं खेसरावां गांव के किसान एक अदद सरकारी ट्यूबवेल लगवाने की गुहार लगा रहे हैं। बड़ी दिक्कतों के साथ फसल उगाते हैं और क्रय केंद्रों पर अफसरों की कारगुजारी के चलते मजबूरन प्राइवेट लोगों को फसल बेचते हैं। सरकार का दावा किसानों की आय दोगुनी करने का खेसरावां गांव में खोखला सा लगता है। 
ब्यूरो रिपोर्ट खबर जोन

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