MIRZAPUR REVIEW | मिर्ज़ापुर 2 देखने से पहले इसे पढ़ लिजिए, नहीं तो पछताएंगे

मुंबई | मिर्ज़ापुर, तुमसे ये उम्मीद ना थी कालीन भैया. इतना ठंडा गए हो बे. गुड्डू तुम्हरा में तो कौनो दमे ना दिखा. एक ठो गोलू को छोड़ दें तो मिर्ज़ापुर

मुंबई | मिर्ज़ापुर, तुमसे ये उम्मीद ना थी कालीन भैया. इतना ठंडा गए हो बे. गुड्डू तुम्हरा में तो कौनो दमे ना दिखा. एक ठो गोलू को छोड़ दें तो मिर्ज़ापुर 2 सही में बताएं तो 2 नंबर की लगी. पहली वाली के आसो-पास नहीं. देखो 3 एपिसोड के आखिर तक तो एक गोली भी नहीं चली, ना ही कौनो ऐसा डायलॉग जो जबान को चढ़ जाए. रतिशंकर के बिटवा शरद शुक्ला को मौका दिया गया था लेकिन ना, उनसे भी कुछ नहीं हो पाया. बबलू का कमी तो कोई पूरा नहीं कर पाया. एक ठो और कैरेक्टर आया है रॉबिन, उसका कैरेक्टर कुछ बोलता है लेकिन मिर्ज़ापुर टाइप वाला कैरेक्टर नहीं है. 
10 एपिसोड हैं मिर्ज़ापुर 2 में, लेकिन 6 एपिसोड तक तो कहानी पिछली बार की कहानी से आगे उठती ही नहीं. लगता है कि जबरदस्ती ही बना दिया गया है, हम लोगों को चू** बनावे के खातिर. मुन्ना भैया पिछला बार भी अपना ही तेवर में थे और इस बार भी अपना तेवर में है, लेकिन बाप से मरा रहे हैं. बिहार के त्यागियों का नया नवेला खानदान इस खून की होली में शामिल हुआ है, उनका भी रिस्पॉन्स कुछ खास नहीं रहा. 
बाकी कुल कहानी थोड़े कह देंगे कि आप देखबे मत करिए मिर्ज़ापुर, अरे देखिए-देखिए, 2 साल इंतज़ार जौन किए हैं. मज़ा ना आने की पूरी गारंटी है और हां आपको ललित का डेथ डिसअप्वाइंट करेगा. एन्जॉय


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