लखनऊ के इटौंजा के महोना में कब्रिस्तान की जमीन को लेकर विवाद हो गया है, लोगों के मुताबिक सन 1975 में पूर्व प्रधान नजीर हसन ने यासीन के नाम पर पट्टा कर
लखनऊ के इटौंजा के महोना में कब्रिस्तान की जमीन को लेकर विवाद हो गया है, लोगों के मुताबिक सन 1975 में पूर्व प्रधान नजीर हसन ने यासीन के नाम पर पट्टा कर दिया था पर अब यासीन के बेटे सलीम जमीन पर अपना हक बताते हुए मकान बनवाना चाहते हैं पर स्थानीय लोगों ने कब्रिस्तान की जमीन पर मकान बनाने का विरोध किया है।
- महोना में कब्रिस्तान की जमीन को लेकर विवाद
- कब्रिस्तान की जमीन पर 45 साल पहले हुआ था पट्टा
- कब्रिस्तान की जमीन पर मकान बनाने की कोशिश
- लोगों के विरोध के चलते मकान का निर्माण रुका
पिछड़ा मुस्लिम मोमिन समाज तंजीम के उपाध्यक्ष अकील खान ने बताया कि यहां पर सैकड़ों वर्षों से कब्रिस्तान है और लोगों के शवों को यहां पर दफन किया जाता है। हमेशा से वहां पर कब्रिस्तान रहा है और किसी का वहां पर कोई कब्जा नहीं है। अकील खान आगे बताते है कि हम लोगों ने जिलाधिकारी, बक्शी का तालाब के एसडीएम, एसपी ग्रामीण को प्रार्थना पत्र दे लिया है। लेखपाल ने मौके का निरीक्षण करके रिपोर्ट में कब्रिस्तान का जिक्र किया है। 
वही बुजुर्ग इकबाल का कहना है जब से उन्होंने होश संभाला तो वहां पर कब्रिस्तान को देखा है, वहां पर किसी की खेती बाड़ी या किसी का कब्जा नहीं है, अब पता चला का है कि वहां पर किसी का पट्टा हो गया है और मकान बनाना चाहते हैं।
स्थानीय निवासी सईद बेग ने बताया कि कब्रिस्तान की जमीन पर वो लोग कब्जा करना चाहते है, कभी उनके पिता के नाम पर पट्टा हुआ होगा। इस कब्रिस्तान में बेग के पिता और दादा की कब्रें बनी हुई है। जिनके नाम पट्टा हुआ था वो लोग कभी यहां रहने नहीं आए और न जमीन पर अपनी दावेदारी के लिए कब्जा किया।

जब इस प्रकरण के बारे में सलीम के घर का रुख किया तो वो घर पर नहीं मिले, उनकी मां ने बताया कि वो घर पर नहीं हैं। नगर पंचायत के दफ्तर से पता चला कि पट्टा सलीम के पिता यासीन के नाम पर है पर वो अब दावेदारी पेश कर रहे हैं जबकि वहां पर लोगों की कब्रे बनी हैं और कब्रिस्तान है, कोर्ट से पट्टा निरस्त की प्रक्रिया होगी।



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