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समर्थन की कांग्रेसी चाल, क्या करेंगे केजरीवाल?

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नई दिल्ली। दिल्ली में सरकार बनाना
और न बनाना सियासत का सबसे बड़ा खेल हो गया है। ये ऐसी सियासत है जो अब तक देश में
देखने को नहीं मिली थी। बीजेपी ने सरकार बनाने से मना कर दिया है तो कांग्रेस ने
एलजी के पास जाकर आम आदमी पार्टी को सरकार बनाने का समर्थन देने की बात कह कर
कहानी में ट्विस्ट ला दिया है।
कांग्रेस की सियासी चाल!
कांग्रेस की इस सियासी चाल के चलते
ही बीजेपी ने भी देर शाम आम को समर्थन की बात कह दी। अब आप के लिए मुश्किल है कि
वो अल्पमत की सरकार चलाएगी तो उस पर आरोप लग सकता है कि वो दोनों पार्टियों से
अंदर ही अंदर कोई सौदा कर के किसी तरह से सरकार में बने रहना चाहती है। ख़ैर अब
गेंद अरविंद केजरीवाल के पाले में है जो 10.30 बजे दिल्ली के उपराज्यपाल से
मिलेंगे और अपनी पार्टी की राय रखेंगे। सियासी पंडितों के मुताबिक अरविंद भी सरकार
बनाने से पीछे हट जाएंगे।

हम पहले ही फैसला कर चुके हैं न हम
कांग्रेस के साथ जाएंगे
, ना भाजपा के साथ। हम
जनता के बीच इसी वादे के साथ गए थे
, ऐसे में हम कांग्रेस के
साथ जाते हैं तो ये जनता के साथ धोखा होगा।
 
– शाजिया इल्मी, आप विधायक, आरकेपुरम

ख़बर ज़ोन की राय
हमारी राय में अब इस मौक़े को आम
आदमी पार्टी सियासी तौर से दूसरी तरह इस्तेमाल कर सकती है और दिल्ली की जनभावना का
खयाल रखते हुए और दोबारा चुनाव का विकल्प न देते हुए आम आदमी पार्टी को सरकार
बनाने की पेशकश करनी चाहिए और अगर आप विश्वास मत हासिल नहीं कर पाती है तो कांग्रेस
और बीजेपी पर दिल्ली से धोख़ा देने का आरोप लगेगा। हालांकि कांग्रेस के पास न तो
कुछ पाने के लिए है न खोने के लिए लिहाज़ा वो अगर 8 सदस्यों के साथ आप के समर्थन
में खड़ी रहती है तो सरकार अल्पमत में होने के बावजूद चलेगी और संकल्प के मुताबिक
15 दिसंबर को आम आदमी पार्टी दिल्ली में सरकार भी बना लेगी। इसके बाद उसके पास
लोगों की उम्मीदों पर ख़रा उतरने की चुनौती होगी और अगर वो ये कर लेती हैं तो उसके
लिए लोकसभा चुनावों में मौके ज़्यादा बेहतर हो सकते हैं

लोकसभा चुनाव में होगा फायदा

अगर दिल्ली में सरकार बन जाती है तो
कम से कम दिल्ली में दोबारा चुनाव नहीं होंगे तो आम आदमी पार्टी के पास मौका रहेगा
कि वो लोकसभा चुनावों के लिए विचार कर सके जिसके लिए वक़्त बेहद कम है। और अगर
दिल्ली में ही दोबारा चुनाव हुए तो उन्हें दोहरी लड़ाई लड़नी होगी।
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