#P7News employees are still registering their protest by their indefinite Dharna inside the campus. These are journalists and their pens are still ru
काश के तुमने हमें छेड़ा ना होता
आज भी ये गुलिश्तां मुनव्वर होता
वो फूल बागबां के बागी ना बनते
जो खुशबू को तूने छीना ना होता
काश के तुमने हमें छेड़ा ना होता
हम सीप के मोती थे, तूने समंदर बना दिया
तुम क़त्ल ना करते, ये ज़लज़ला ना होता
ज़रा खामोशी में उस शोर को सुनो
ना तू हम पे हंसता, ना ये तूफ़ान आता
काश के तुमने हमें छेड़ा ना होता
आज भी ये गुलिश्तां मुनव्वर होता
वो वजूद का रिश्ता था, ये वजूद की जंग है
अपनों से बस थोड़ी गुज़ारिश ही कर लेता
ग़ैरों के सामने हाथ फैलाना ना पड़ता
देर से भी तू दुरुस्त ना हो सका है
वरना ना ये जंग होती, ना ये भीख का कटोरा होता
काश के तुमने हमें छेड़ा ना होता
आज भी ये गुलिश्तां मुनव्वर होता
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