नई दिल्ली। कल दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के भारी ड्रामे के बाद सदन में जनलोकपाल न पेश कर पाने पर मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को इस्तीफा द
नई दिल्ली। कल दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के भारी ड्रामे के बाद सदन में जनलोकपाल न पेश कर पाने पर मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को इस्तीफा देना पड़ा। कांग्रेस और भाजपा के अनुसार आम आदमी पार्टी की कलई जनता के सामने खुल चुकी है। दरअसल ‘आप’ सरकार ही नहीं चलाना चाहती है और वो हमेशा ज़िम्मेदारी से भागने की कोशिश करती रही है। भाजपा के नेताओं के अनुसार वो चुनाव में जाना चाहती है क्यूंकि उन्हें लगता है कि वो केजरीवाल सरकार की नाकामियों को बता कर उनके खिलाफ आसानी से जीत दर्ज कर लेंगे। उधर अगर सोशल मीडिया पर भी भाजपा द्वारा केजरीवाल के खिलाफ किये जा रहे प्रचार पर ध्यान देंगें तो पाएंगे कि उन्हें वहां भगोड़ा और ना जाने क्या-क्या कहा जा रहा है।
लेकिन जब हम आम आदमी पार्टी के डोनेशन फंड पर ध्यान दें तो जनता का रोष भाजपा के बिलकुल उलट नज़र आता है। कल जिस वक़्त अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया है उसके बाद पार्टी फंड में अचानक ज़बरदस्त उछाल आ गया। ऐसा लग रहा है जैसे अरविन्द केजरीवाल और ‘आप’ के समर्थक भाजपा के साथ सीधी लड़ाई में अपने नेता को किसी भी तरह की कमी नहीं होने देना चाहते हैं। अगर ‘आप’ के वेबसाइट पर गौर करें तो केजरीवाल के इस्तीफे के बाद पार्टी फण्ड में कल से अब तक डोनेशन में 800% तक की वृद्धि हो चुकी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि ये डोनेशन की तेजी क्या वोट में भी तब्दील होगी।

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