मोदी को नसीहत, खुद परहेज क्यूँ

पटना। एक बार नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम समुदाय में प्रचलित टोपी पहनने से इनकार कर दिया था। उसके बाद नीतीश कुमार ने आलोचना करते हुए कहा था, 'राजनीति


पटना। एक बार नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम समुदाय में प्रचलित टोपी पहनने से इनकार कर दिया था। उसके बाद नीतीश कुमार ने आलोचना करते हुए कहा था, ‘राजनीति में कभी टोपी पहननी पड़ती है और कभी टीका भी लगाना पड़ता है।’ लेकिन आज पटना में नीतीश कुमार ने कुछ ऐसा कर दिया कि सभी स्तबध रह गए। दरअसल, कल मुख्यमंत्री पटना साहिब स्थित प्रसिद्ध गुरुद्वारा गए थे। जहां सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह का जन्‍म हुआ था. वहां उन्‍हें नए रेस्‍ट हाउस का उद्घाटन करना था। गुरुद्वारा कमेटी के मुताबिक, परिसर में घुसते वक्‍त जब नीतीश को सिर ढकने को कहा गया, तो उन्‍होंने इससे मना कर दिया।

इतना ही नहीं, नीतीश कुमार ने सर न ढकने का एक अजीब सा और बेतुका बहाना बताया। उन्‍होंने कहा कि उनकी तबीयत खराब है। सीएम कुछ मिनट तक गुरुद्वारे में रुके, इस दौरान उनका सिर पूरी तरह खुला ही था। नीतीश के वहां से चले जाने के बाद गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी ने विराध जताया. मैनेजमेंट ने कहा कि सीएम ने सिख समुदाय के प्रति असम्‍मान दिखाया है, जो गलत है। गुरुद्वारा कमेटी के महासचिव सरदार चरणजीत सिंह के अनुसार जब कोई गुरुद्वारे में आता है, तो वह अपना सिर ढकता है। नीतीश कुमार को भी ऐसा करना चाहिए था, लेकिन उन्‍होंने नहीं किया। यह सिख समुदाय के प्रोटोकॉल का साफ उल्‍लंघन है।

अब देखना ये है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के रवैये से प्रदेश की राजनीति कितनी गर्माती है। क्यूंकि नीतीश के खिलाफ विपक्ष को बैठे-बिठाए एक अच्‍छा मुद्दा हाथ लग गया है। विपक्ष ने नीतीश को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस घटना से मुख्‍यमंत्री का ‘सेकुलर’ चेहरा सबके सामने आ गया है। अब नीतीश ने इसी तरह के नए विवाद को जन्‍म दे दिया है. सियासी गलियारों में यह मुद्दा अभी छाए रहने के आसार हैं। क्यूंकि आने वाले लोकसभा चुनाव में हर एक इसे अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश करेगा।







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