लखनऊ। गणतंत्र दिवस के दौरान लखनऊ में ऐसा कुछ हुआ जो आज पहले कभी नहीं हुआ था। दरअसल इस ख़ास दिन के लिए कई गणमान्य अतिथियो को आमंत्रित किया जाता है। लेकिन इस गणतंत्र दिवस परेड पर तंत्र की ओर से गणों से न केवल अभद्रता की गई बल्कि उन्हें धक्का देकर विधानसभा के बाहर निकाल दिया गया। आमंत्रित गणमान्य व्यक्तियों में कुछ जनप्रतिनीधि, समाजसेवक के साथ साथ कई पदाधिकारी और अन्य महत्वपूर्ण अतिथि भी उपस्थित थे। लेकिन इनके साथ आज जिस तरह से यूपी पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की की गयी है वो अखिलेश सरकार के कार्य-कलापों पर सवालिया निशान खड़ा करती है। बेइज्जती से नाराज कई विधायक व विभागों के आला अधिकारी घर वापस लौट गए।
दरअसल 26 जनवरी को विधानसभा के सामने से निकली परेड के समापन पर आमंत्रित अतिथियों के लिए विधानसभा में जलपान की व्यवस्था की गयी थी, लेकिन जब आमंत्रित अतिथि भीतर जाने लगे तो ड्यूटी पर तैनात पुलिसवालों ने उन्हें जाने से रोका। पास दिखाने के बावजूद लोगों को किनारे हटा दिया गया। लोगों ने जब कारण पूछे तो अभद्रता करते हुए उन्हें बाहर धकेल दिया गया। यहां तक कि हालात हाथापाई तक पहुंच गए। आमंत्रणपत्र होने के बावजूद हुई इस बेइज्जती से नाराज अतिथि वापस लौट गए।
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स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी ने नाराजगी जताई कि “कार्ड दिखाने के बावजूद, पुलिसवालों ने ऐसा बर्ताव किया जैसे हम लोगों ने कोई जघन्य अपराध कर दिया हो।” वापस लौट रहे एक विधायक अपने साथियों से नाराजगी कुछ यूं बयां कर रहे थे, “पुलिसवालों की शिकायत नेताजी मुलायम सिंह यादव व मुख्यमंत्री से करूंगा। इससे पार्टी की इमेज खराब हुई है।” वैसे अखिलेश राज में पुलिस वालों की दबंगई यूपी में चारो तरफ दिखाई दे रही है, देखना होगा मुख्यमंत्री कब इनलोगों के खिलाफ कारवाई करते हैं।
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